Sunday, October 2, 2011
Wednesday, August 10, 2011
तुम्हारी जेब में पैसा-ही-पैसा
साईं बाबा अपने शिष्य के साथ बैठे आध्यात्मिक विषय पर बातें कर रहे थे कि तभी एक बूढ़ा व्यक्ति रोता-पीटता आया और हाथ जोड़कर साईं बाबा के सामने आकर जोर-जोर से रोने लगा|
"क्या हो गया बाबा ?" - एक शिष्य ने उस बूढ़े से पूछा|
"मेरा जवान लड़का मर गया| मेरे पास उसे कफन-दफन करने के लिए एक पैसा भी नहीं|" वह निरंतर आँसू बहाये जा रहा था|
साईं बाबा ने उसकी ओर देखा और पूछा -
"कब मरा लड़का ?"
"आज दोपहर| मैं कई जगह गया, पर किसी ने मेरी कोई मदद नहीं की|"
"जब तुम्हारे पास स्वयं ही इतने सारे रुपये हैं, तो कोई तुम्हारी मदद क्यों करता|" यह कहकर साईं बाबा हँसने लगे|
"साईं बाबा !" बूढ़ा गिड़गिड़ाकर बोला - "मेरे पास तो इस समय एक फूटी कौड़ी भी नहीं है|"
"झूठ बोलते हो|" साईं बाबा ने कहा - "अपनी जेब में हाथ डालो| वहां पैसा-ही-पैसा भरा पड़ा है|"
जब उस बूढ़े ने जेब में हाथ डाला, अचानक ढेरसारे नोट निकल आये| वह हैरानी से देखता रह गया| आश्चर्य के मारे आँखें फटी-सी रह गयीं|
"जाओ, अपना काम करो|" साईं बाबा ने कहा|
वह बूढ़ा साईं बाबा की जय-जयकार करता वहां से चला गया| सारे शिष्य हैरानी के साथ सारा दृश्य देखते रह गये| उस बूढ़े की फटी हुई जेब से रुपया-ही-रुपया निकलना बहुत ही आश्चर्य की बात थी| सबने इसे साईं बाबा का एक चमत्कार माना और बाबा कि जय-जयकार करने लगे| साईं बाबा का यह चमत्कार अद्भुत था|
साईं बाबा अपने शिष्य के साथ बैठे आध्यात्मिक विषय पर बातें कर रहे थे कि तभी एक बूढ़ा व्यक्ति रोता-पीटता आया और हाथ जोड़कर साईं बाबा के सामने आकर जोर-जोर से रोने लगा|"क्या हो गया बाबा ?" - एक शिष्य ने उस बूढ़े से पूछा|
"मेरा जवान लड़का मर गया| मेरे पास उसे कफन-दफन करने के लिए एक पैसा भी नहीं|" वह निरंतर आँसू बहाये जा रहा था|
साईं बाबा ने उसकी ओर देखा और पूछा -
"कब मरा लड़का ?"
"आज दोपहर| मैं कई जगह गया, पर किसी ने मेरी कोई मदद नहीं की|"
"जब तुम्हारे पास स्वयं ही इतने सारे रुपये हैं, तो कोई तुम्हारी मदद क्यों करता|" यह कहकर साईं बाबा हँसने लगे|
"साईं बाबा !" बूढ़ा गिड़गिड़ाकर बोला - "मेरे पास तो इस समय एक फूटी कौड़ी भी नहीं है|"
"झूठ बोलते हो|" साईं बाबा ने कहा - "अपनी जेब में हाथ डालो| वहां पैसा-ही-पैसा भरा पड़ा है|"
जब उस बूढ़े ने जेब में हाथ डाला, अचानक ढेरसारे नोट निकल आये| वह हैरानी से देखता रह गया| आश्चर्य के मारे आँखें फटी-सी रह गयीं|
"जाओ, अपना काम करो|" साईं बाबा ने कहा|
वह बूढ़ा साईं बाबा की जय-जयकार करता वहां से चला गया| सारे शिष्य हैरानी के साथ सारा दृश्य देखते रह गये| उस बूढ़े की फटी हुई जेब से रुपया-ही-रुपया निकलना बहुत ही आश्चर्य की बात थी| सबने इसे साईं बाबा का एक चमत्कार माना और बाबा कि जय-जयकार करने लगे| साईं बाबा का यह चमत्कार अद्भुत था|
Tuesday, August 9, 2011
श्री शनि चालीसा
जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥
परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं आरिहिं संहारा ॥
पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन ॥
सौरी, मन्द, शनि, दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥
जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं । रंकहुं राव करैंक्षण माहीं ॥
पर्वतहू तृण होई निहारत । तृण हू को पर्वत करि डारत ॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हो । कैकेइहुं की मति हरि लीन्हों ॥
बनहूं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चतुराई ॥
लखनहिं शक्ति विकल करि डारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥
रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥
दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥
हार नौलाखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥
विनय राग दीपक महं कीन्हों । तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हों ॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥
तैसे नल परदशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥
श्री शंकरहि गहयो जब जाई । पार्वती को सती कराई ॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रौपदी होति उघारी ॥
कौरव के भी गति मति मारयो । युद्घ महाभारत करि डारयो ॥
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥
शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ई ॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥
जम्बुक सिंह आदि नखधारी । सो फल जज्योतिष कहत पुकारी ॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं ॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा । गर्दभ सिद्घ कर राज समाजा ॥
जम्बुक बुद्घि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्रण संहारै ॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥
तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चांजी अरु तामा ॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ॥
समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्व सुख मंगल कारी ॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥
अदभुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
कहत रामसुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥
॥ दोहा ॥
|| इति श्री शनि चालीसा समाप्त ||
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥
परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं आरिहिं संहारा ॥
पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन ॥
सौरी, मन्द, शनि, दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥
जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं । रंकहुं राव करैंक्षण माहीं ॥
पर्वतहू तृण होई निहारत । तृण हू को पर्वत करि डारत ॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हो । कैकेइहुं की मति हरि लीन्हों ॥
बनहूं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चतुराई ॥
लखनहिं शक्ति विकल करि डारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥
रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥
दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥
हार नौलाखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥
विनय राग दीपक महं कीन्हों । तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हों ॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥
तैसे नल परदशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥
श्री शंकरहि गहयो जब जाई । पार्वती को सती कराई ॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रौपदी होति उघारी ॥
कौरव के भी गति मति मारयो । युद्घ महाभारत करि डारयो ॥
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥
शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ई ॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥
जम्बुक सिंह आदि नखधारी । सो फल जज्योतिष कहत पुकारी ॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं ॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा । गर्दभ सिद्घ कर राज समाजा ॥
जम्बुक बुद्घि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्रण संहारै ॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥
तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चांजी अरु तामा ॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ॥
समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्व सुख मंगल कारी ॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥
अदभुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
कहत रामसुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥
॥ दोहा ॥
पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार । करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥
|| इति श्री शनि चालीसा समाप्त ||
आरती बजरंगबली की
आरती बजरंगबली की
आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।
जाके बल से गिरिवर कांपै । रोग-दोष जाके निकट न झांपै ।।
अंजनि पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रभु सदा सहाई ।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए । लंका जारि सिया सुधि लाये ।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई ।।
लंका जारि असुर सब मारे । सियाराम जी के काज संवारे ।।
लक्ष्मण मूर्च्छित पड़े सकारे । लाय संजीवन प्राण उबारे ।।
पैठि पताल तोरि जमकारे । अहिरावण की भुजा उखारे ।।
बाईं भुजा असुर संहारे । दाईं भुजा संत जन तारे ।।
सुर नर मुनि आरती उतारें । जय जय जय हनुमान उचारें ।।
कंचन थार कपूर लौ छाई । आरति करत अंजना माई ।।
जो हनुमान जी की आरती गावे । बसि बैकुण्ठ परमपद पावे ।।
लंक विध्वंस किए रघुराई । तुलसिदास प्रभु कीरति गाई ।।
अथ बजरंग बाण
अथ बजरंग बाण
।। दोहा ।।
निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।।
जय हनुमन्त सन्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
जन के काज विलम्ब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख दीजै ।।
जैसे कूदि सुन्धु वहि पारा । सुरसा बद पैठि विस्तारा ।।
आगे जाई लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुर लोका ।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा । सीता निरखि परम पद लीन्हा ।।
बाग उजारी सिन्धु महं बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ।।
अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेट लंक को जारा ।।
लाह समान लंक जरि गई । जय जय धुनि सुरपुर मे भई ।।
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी । कृपा करहु उन अन्तर्यामी ।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता । आतुर होय दुख हरहु निपाता ।।
जै गिरिधर जै जै सुखसागर । सुर समूह समरथ भटनागर ।।
जय हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारु बज्र की कीले ।।
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो । महाराज प्रभु दास उबारो ।।
ऊँ कार हुंकार महाप्रभु धावो । बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ।।
ऊँ हीं हीं हनुमन्त कपीसा । ऊँ हुं हुं हनु अरि उर शीशा ।।
सत्य होहु हरि शपथ पाय के । रामदूत धरु मारु जाय के ।।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।
पूजा जप तप नेम अचारा । नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ।।
वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।।
पांय परों कर जोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
जय अंजनि कुमार बलवन्ता । शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ।।
बदन कराल काल कुल घालक । राम सहाय सदा प्रति पालक ।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर । अग्नि बेताल काल मारी मर ।।
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की । राखु नाथ मरजाद नाम की ।।
जनकसुता हरि दास कहावौ । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।।
जय जय जय धुनि होत अकाशा । सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ।।
चरण शरण कर जोरि मनावौ । यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ।।
उठु उठु उठु चलु राम दुहाई । पांय परों कर जोरि मनाई ।।
ऊं चं चं चं चपल चलंता । ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।।
ऊँ हं हं हांक देत कपि चंचल । ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल ।।
अपने जन को तुरत उबारो । सुमिरत होय आनन्द हमारो ।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै । ताहि कहो फिर कौन उबारै ।।
पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करैं प्राम की ।।
यह बजरंग बाण जो जापै । ताते भूत प्रेत सब कांपै ।।
धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेशा ।।
।। दोहा ।।
प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।।
संकटमोचन हनुमानाष्टक
संकटमोचन हनुमानाष्टक
।। मत्तगयन्द छन्द ।।
बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अँधियारो ।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ।।
देवन आनि करी विनती तब, छांड़ि दियो रवि कष्ट निहारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ।। 1 ।।
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।।
चौंकि महामुनि शाप दियो तब, चाहिये कौन विचार विचारो ।
कै द्घिज रुप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो ।। 2 ।।
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत न बचिहों हम सों जु, बिना सुधि लाए इहां पगु धारो ।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया सुधि प्राण उबारो ।। 3 ।।
रावण त्रास दई सिय को तब, राक्षसि सों कहि सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय अशोक सों आगि सु, दे प्रभु मुद्रिका सोक निवारो ।। 4 ।।
बाण लग्यो उर लक्ष्मण के तब, प्राण तजे सुत रावण मारो ।
लै गृह वैघ सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु-बीर उपारो ।
आनि संजीवनी हाथ दई तब, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो ।। 5 ।।
रावण युद्घ अजान कियो तब, नाग की फांस सबै सिरडारो ।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो ।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बन्धन काटि सुत्रास निवारो ।। 6 ।।
बन्धु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पाताल सिधारो ।
देवहिं पूजि भली विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तबही, अहिरावण सैन्य समैत संहारो ।। 7 ।।
काज किये बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि विचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसो नहिं जात है टारो ।
बेगि हरौ हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो ।। 8 ।।
।। दोहा ।।
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर ।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ।।
श्री हनुमान चालीसा
श्री हनुमान चालीसा
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि ।
बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु पल चारि ।।
बुद्घिहीन तनु जानिकै, सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुद्घि विघा देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ।।
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर । जय कपीस तिहुं लोग उजागर ।।
रामदूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ।।
महावीर विक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ।।
कंचन बरन विराज सुवेसा । कानन कुण्डल कुंचित केसा ।।
हाथ वज्र औ ध्वजा विराजै । कांधे मूंज जनेऊ साजै ।।
शंकर सुवन केसरी नन्दन । तेज प्रताप महा जगवन्दन ।।
विघावान गुणी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।।
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा । विकट रुप धरि लंक जरावा ।।
भीम रुप धरि असुर संहारे । रामचन्द्रजी के काज संवारे ।।
लाय संजीवन लखन जियाये । श्री रघुवीर हरषि उर लाये ।।
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।
सहस बदन तुम्हरो यश गावै । अस कहि श्री पति कंठ लगावै ।।
सनकादिक ब्रहादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ।।
यह कुबेर दिकपाल जहां ते । कवि कोबिद कहि सके कहां ते ।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राजपद दीन्हा ।।
तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ।।
जुग सहस्त्र योजन पर भानू । लाल्यो ताहि मधुर फल जानू ।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही । जलधि लांघि गए अचरज नाहीं ।।
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ।।
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हांक ते कांपै ।।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ।।
नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ।।
संकट ते हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ।।
सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ।।
और मनोरथ जो कोई लावै । सोइ अमित जीवन फल पावै ।।
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्घ जगत उजियारा ।।
साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ।।
अष्ट सिद्घि नवनिधि के दाता । अस वर दीन जानकी माता ।।
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।।
तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ।।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ।।
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेई सर्व सुख करई ।।
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।
जय जय जय हनुमान गुसांई । कृपा करहु गुरुदेव की नाई ।।
जो शत बार पाठ कर सोई । छूटहिं बंदि महासुख होई ।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्घि साखी गौरीसा ।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महं डेरा ।।
।। दोहा ।।
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।
Monday, July 25, 2011
three things in life
Just found this great mail/article.
Three/Teen/3 things in your life are most imp as –
Three things in life that, once gone, never come back
1. Time
2. Words
3. Opportunity
Three things in life that may never be lost
1. Peace
2. Hope
3. Honsety
Three things in life that are most valuable
1. Love
2. Self_Confidence
3. Friends
Three things in life that can never certain
1. Dream
2. Success
3. Fortune
Three things that make man/woman
1. Hardwork
2. Sincerity
3. Commitment
Three things in life that can destroy man/woman
1. Alcohol
2. Pride
3. Anger
Three things in life that once lost , hard to build up
1. Respect
2. Trust
3. Friends
Three things in life that never fail
1.True_Love
2.Determination
3.Belief
Hmmmmm… all are good if one should obey all these then his life will be cool.
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velue of programming code – hindi version
एक चुटकी कोड की क़ीमत तुम क्या जानो बाबू?
ईश्वर का आशीर्वाद होता है एक चुटकी कोड.
डेवेलपर के सर का ताज होता है एक चुटकी कोड,
हर टेसटर का को चाहिए एक चुटकी कोड.
हर पी.एम. का डेड-लाइन होता है एक चुटकी कोड,
हर सी.ई.ओ. का भविष्य होता है एक चुटकी कोड.
हर बेंच रीसोर्स का ख्वाब होता है एक चुटकी कोड,
हर क्लाइंट का एक-एक डॉलेर/पौंड होता है एक चुटकी कोड.
अरे तुम क्या जानो क्या होता है एक चुटकी कोड ??
हर सॉफ्टवेर - इंजिनियर की आन - बान और शान होता है एक चुटकी कोड.
ईश्वर का आशीर्वाद होता है एक चुटकी कोड.
डेवेलपर के सर का ताज होता है एक चुटकी कोड,
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हर बेंच रीसोर्स का ख्वाब होता है एक चुटकी कोड,
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अरे तुम क्या जानो क्या होता है एक चुटकी कोड ??
हर सॉफ्टवेर - इंजिनियर की आन - बान और शान होता है एक चुटकी कोड.
taare zameen par – Meri Maa – hindi translation
मैं कभी बतलता नहीं , पर अंधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं,दिखलता नहीं , तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब हैं पता, हैं ना माँ – - तुझे सब हैं पता,,मेरी माँ
भीड़ में यूँ ना छ्होरो मुझे, घर लौट के भी आ नेया पाऊँ माँ
ेज ना इतना डोर मुजकको तू , याद भी तुझको आ नेया पाऊँ माँ
क्या इतना बुरा हूँ मैं माँ — क्या इतना बुरा मेरी माँ
जब भी कभी पापा मुझे, जो ज़ोर से झूला झूलते हैं माँ
मेरी नज़र ढूँढे तुझे , सोच यही तू आ के थामेगी माँ
उनसे मैं यह कहता नहीं — पर मैं सहम जाता हूँ माँ
चेहरे पे आने देता नहीं, दिल ही दिल में घबराता हूँ माँ
तुझे सब है पता है नेया माँ , तुझे सब है पता मेरी माँ
मैं कभी बतलता नहीं , पर अंधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं,दिखलता नहीं , तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब हैं पता, हैं ना माँ – - तुझे सब हैं पता मेरी माँ
यूँ तो मैं,दिखलता नहीं , तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब हैं पता, हैं ना माँ – - तुझे सब हैं पता,,मेरी माँ
भीड़ में यूँ ना छ्होरो मुझे, घर लौट के भी आ नेया पाऊँ माँ
ेज ना इतना डोर मुजकको तू , याद भी तुझको आ नेया पाऊँ माँ
क्या इतना बुरा हूँ मैं माँ — क्या इतना बुरा मेरी माँ
जब भी कभी पापा मुझे, जो ज़ोर से झूला झूलते हैं माँ
मेरी नज़र ढूँढे तुझे , सोच यही तू आ के थामेगी माँ
उनसे मैं यह कहता नहीं — पर मैं सहम जाता हूँ माँ
चेहरे पे आने देता नहीं, दिल ही दिल में घबराता हूँ माँ
तुझे सब है पता है नेया माँ , तुझे सब है पता मेरी माँ
मैं कभी बतलता नहीं , पर अंधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं,दिखलता नहीं , तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब हैं पता, हैं ना माँ – - तुझे सब हैं पता मेरी माँ
new addition of “meri maa” translation for those who drinks
मैं कभी बतलता नहीं
बार मैं रोज जाता हूँ मैं मा …
यूँ तो मैं दिखलता नहीं
दारू पीकर रोज़ आता हूँ मैं मा
तुझे सब है पता, हैं ना मा
तुझे सब है पता, मेरी मा
ठेके पे यूँ ना छेड़ो मुझे ,
घर लौट के भी आ नेया पाऊँ मैं मा
भेज ना इतना दूर मुझको तू,
घर भी भूल जौन मैं मा
क्या इतना बुरा हूँ मैं मा
क्या इतना बुरा हूँ मैं मा
स्कॉच मैं ,इतना पीता नही,
पेग से सहम जाता हून मैं मा
चेहरे पे आने देता नहीं
लेकिन कभी लूड़क जाता हूँ मैं मा
तुझे सब है पता है ना मा
तुझे सब है पता, मेरी मा
बार मैं रोज जाता हूँ मैं मा …
यूँ तो मैं दिखलता नहीं
दारू पीकर रोज़ आता हूँ मैं मा
तुझे सब है पता, हैं ना मा
तुझे सब है पता, मेरी मा
ठेके पे यूँ ना छेड़ो मुझे ,
घर लौट के भी आ नेया पाऊँ मैं मा
भेज ना इतना दूर मुझको तू,
घर भी भूल जौन मैं मा
क्या इतना बुरा हूँ मैं मा
क्या इतना बुरा हूँ मैं मा
स्कॉच मैं ,इतना पीता नही,
पेग से सहम जाता हून मैं मा
चेहरे पे आने देता नहीं
लेकिन कभी लूड़क जाता हूँ मैं मा
तुझे सब है पता है ना मा
तुझे सब है पता, मेरी मा
सॉफ्टवेर इंजिनियर ज़मीन पर……every इंजिनियर is स्पेशल !!
मैं कभी बतलाता नही , पर कोडिंग से डरता हून मैं PM
यूँ तो मैं, दिखलता नही, पर बेंच पर जाना चाहता हून मैं PM
आपको सब है पता,है ना PM
आपको सब है पता, मेरे PM
इश्यूस में यूँ ना छोड़ो मुझे, घर लौट कर भी जा ना पाऊ PM
भेजते क्यूँ नही ऑनसाइट मुझको आप, याद भी आपको आ ना पाऊ PM
क्या इतना डंब हूँ मैं, अरे बोलते क्यो नही क्या इतना डंब मेरा भेजा PM.
जब भी कभी ऑनसाइट मुझे, ढेर सारी काम देता है
मेरी नज़र ढूँढे आपको, सोचु यूँही आप आकर वर्क डिसट्रिब्यूट करोगे PM
उनसे मैं यह कहता नही, पर टेस्टिंग से पक जाता हूँ PM
चेहरे पे आने देता नही कोई झीजक, कंपनी छ्चोड़ कर भाग जाना चाहता हूँ PM
आपको सब है पता,है ना PM
आपको सब है पता, मेरे PM
यूँ तो मैं, दिखलता नही, पर बेंच पर जाना चाहता हून मैं PM
आपको सब है पता,है ना PM
आपको सब है पता, मेरे PM
इश्यूस में यूँ ना छोड़ो मुझे, घर लौट कर भी जा ना पाऊ PM
भेजते क्यूँ नही ऑनसाइट मुझको आप, याद भी आपको आ ना पाऊ PM
क्या इतना डंब हूँ मैं, अरे बोलते क्यो नही क्या इतना डंब मेरा भेजा PM.
जब भी कभी ऑनसाइट मुझे, ढेर सारी काम देता है
मेरी नज़र ढूँढे आपको, सोचु यूँही आप आकर वर्क डिसट्रिब्यूट करोगे PM
उनसे मैं यह कहता नही, पर टेस्टिंग से पक जाता हूँ PM
चेहरे पे आने देता नही कोई झीजक, कंपनी छ्चोड़ कर भाग जाना चाहता हूँ PM
आपको सब है पता,है ना PM
आपको सब है पता, मेरे PM
tips for a succesull job – funny saying. :: सफल नौकरी करने के कुछ नुस्खे
नीचे की कुछ पंक्तिया मेरी लिखी हुई नही है, मैंने उसका सिर्फ़ हिन्दी अनुवाद किया है. …
सफल नौकरी करने के कुछ नुस्खे
१. बने रहो पगला, काम करेगा अगला.
२. काम से रहो गुल, त्वन्ख्वा पाओ फुल.
३. मत लो टेंशन, वरना परिवार पायेगा पेंशन.
४. काम से डरो नही, और काम को करो नही.
५. काम करो या न करो, काम के फिक्र जरुर करो.
और फिक्र करो या न करो, जिक्र जरुर करो.
जनहित मैं जारी.
सफल नौकरी करने के कुछ नुस्खे
१. बने रहो पगला, काम करेगा अगला.
२. काम से रहो गुल, त्वन्ख्वा पाओ फुल.
३. मत लो टेंशन, वरना परिवार पायेगा पेंशन.
४. काम से डरो नही, और काम को करो नही.
५. काम करो या न करो, काम के फिक्र जरुर करो.
और फिक्र करो या न करो, जिक्र जरुर करो.
जनहित मैं जारी.
रॉक ओंन !!! पिछले सात दीनो में मैने खोया
:: जन हित मैं जारी नोट ::
मैंने इसका सिर्फ़ हिन्दी अनुवाद किया है.
और कुछ पंक्तियों मैं फेर-फार किया है.
अगर आपको लगता है की, कंही और भी बदलाव किया जा सकता है तो तुंरत कमेन्ट जोडीये.
मेरे सर का इतना लोड,
एक आधा PHP,Perl का कोड
ना ना ना ना ना
ना ना ना ना ना…
एक लड़की का एक्सटेन्षन,
मेरे पापा की पेन्षन
ना ना ना ना ना
ना ना ना ना ना…,
मेरे बाईक का एक हान्डेल
लड़की से पड़ी काली सॅंडल
पिछले सात दीनो में मैने खोया
कभी खुद पे हंसा मैं और कभी खुद पे रोया
ना ना ना ना ना …
ना ना ना ना ना …
ना ना ना ना ना …
ना ना ना ना ना ….
R&R का एक अवॉर्ड,
८० जी-बी B का ई-पॉड
ना ना ना ना ना
ना ना ना ना ना…
मेरी फ्रूटी की पॅकेट,
बॅडमिंटन की एक रॅकेट
ना ना ना ना ना
ना ना ना ना ना…
मेरा गंजा सा PM,
कल की लास्ट बस ऑफ ९ PM
पिछले सात दीनो में मैने खोया
कभी खुद पे हंसा मैं,
और कभी खुद पे…रोया
कैसे भूलूं …..
फ्राइडे का दिन जो आया
किसी ने तुमसे एक प्रॉजेक्ट में मिलवाया
कैसा पल था जिस पल मैने तुमको पहली बार देखा था……आ आ आ…
हम जो मिले पहली बार,
मैने जाना.. क्या है प्यार
मैने होश भी खोया दिल भी खोया
कभी खुद पे हंसा मैं,
और कभी खुद पे रोया
ना ना ना ना ना…
ना ना ना ना ना…
ना ना ना ना ना…
ना ना ना ना ना…
मैने पिछले सात दीनो में ये सब है, खोया
तो कहो मजा आया या नही.
मैंने इसका सिर्फ़ हिन्दी अनुवाद किया है.
और कुछ पंक्तियों मैं फेर-फार किया है.
अगर आपको लगता है की, कंही और भी बदलाव किया जा सकता है तो तुंरत कमेन्ट जोडीये.
मेरे सर का इतना लोड,
एक आधा PHP,Perl का कोड
ना ना ना ना ना
ना ना ना ना ना…
एक लड़की का एक्सटेन्षन,
मेरे पापा की पेन्षन
ना ना ना ना ना
ना ना ना ना ना…,
मेरे बाईक का एक हान्डेल
लड़की से पड़ी काली सॅंडल
पिछले सात दीनो में मैने खोया
कभी खुद पे हंसा मैं और कभी खुद पे रोया
ना ना ना ना ना …
ना ना ना ना ना …
ना ना ना ना ना …
ना ना ना ना ना ….
R&R का एक अवॉर्ड,
८० जी-बी B का ई-पॉड
ना ना ना ना ना
ना ना ना ना ना…
मेरी फ्रूटी की पॅकेट,
बॅडमिंटन की एक रॅकेट
ना ना ना ना ना
ना ना ना ना ना…
मेरा गंजा सा PM,
कल की लास्ट बस ऑफ ९ PM
पिछले सात दीनो में मैने खोया
कभी खुद पे हंसा मैं,
और कभी खुद पे…रोया
कैसे भूलूं …..
फ्राइडे का दिन जो आया
किसी ने तुमसे एक प्रॉजेक्ट में मिलवाया
कैसा पल था जिस पल मैने तुमको पहली बार देखा था……आ आ आ…
हम जो मिले पहली बार,
मैने जाना.. क्या है प्यार
मैने होश भी खोया दिल भी खोया
कभी खुद पे हंसा मैं,
और कभी खुद पे रोया
ना ना ना ना ना…
ना ना ना ना ना…
ना ना ना ना ना…
ना ना ना ना ना…
मैने पिछले सात दीनो में ये सब है, खोया
तो कहो मजा आया या नही.
jai ho lyrics hindi, awesome lyrics
जय हो, जय हो
आजा आजा हिंद शामियाने के तले, आजा जरीवले नीले आसमान के तले
जय हो, जय हो
रत्ती रत्ती साची मैने जान गवाई है, नाच नाच खयालो पे रात बिताई है
अखियों की नींद मैने फूंको से उड़ा दी, नीले तारे से मैने उंगली जलाई है
आजा आजा हिंद शामियाने के तले, आजा जरीवले नीले आसमान के तले
चख ले हो चख ले ये रात शहद है चख ले, रख ले हाँ दिल है दिल आखरी हद है रख ले
काला काला काजल तेरा कोई कला जादू है ना, काला काला काजल तेरा कोई काला जादू है ना
आजा आजा हिंद शामियाने के तले, आजा जरीवले नीले आसमान के तले
जय हो, जय हो!! जय हो, जय हो!!
कब से हा कब से तू लब पे रुकी है कह दे, कह दे हा कह दे अब आँख झुकी है.. कह दे
ऐसी ऐसी रोशन आँखे रोशन दोनो भी है है क्या…
आजा आजा हिंद शामियाने के तले, आजा जरीवले नीले आसमान के तले
जय हो, जय हो!! जय हो, जय हो!!
आजा आजा हिंद शामियाने के तले, आजा जरीवले नीले आसमान के तले
जय हो, जय हो
रत्ती रत्ती साची मैने जान गवाई है, नाच नाच खयालो पे रात बिताई है
अखियों की नींद मैने फूंको से उड़ा दी, नीले तारे से मैने उंगली जलाई है
आजा आजा हिंद शामियाने के तले, आजा जरीवले नीले आसमान के तले
चख ले हो चख ले ये रात शहद है चख ले, रख ले हाँ दिल है दिल आखरी हद है रख ले
काला काला काजल तेरा कोई कला जादू है ना, काला काला काजल तेरा कोई काला जादू है ना
आजा आजा हिंद शामियाने के तले, आजा जरीवले नीले आसमान के तले
जय हो, जय हो!! जय हो, जय हो!!
कब से हा कब से तू लब पे रुकी है कह दे, कह दे हा कह दे अब आँख झुकी है.. कह दे
ऐसी ऐसी रोशन आँखे रोशन दोनो भी है है क्या…
आजा आजा हिंद शामियाने के तले, आजा जरीवले नीले आसमान के तले
जय हो, जय हो!! जय हो, जय हो!!
Mann Ka Radio Hindi Lyrics
मन का रेडियो बजने दे जरा, गम को भूल कर जी ले तू जरा.
स्टेशन कोई नया tune कर ले जरा, full to attitude दे दे तू जरा.
टुटा दिल क्या हुआ, हो गया जो हुआ .. आ आ आ आ. …
भूले बिसरे गीत गाके तू भूल जा.
बदला जो rhythm उसपे जा
full to attitude दे दे तू जरा. आ आ आ आ आ
क्या होगा क्या नहीं होगा ऊपर वाले पर छोड़ दे. ऊपर वाले पर छोड़ दे.
आज इस पल मैं तू ज़िन्दगी को जी जरा, तुझको आकाश की वाणी का है वास्ता.
क्या खोया क्या नहीं पाया उसपे रोना तू छोड़ दे , उसपे रोना तू छोड़ दे.
band जो बजे तेरा खुल के तू भी साथ गा दर्द ही बने दवा funda है ये लाइफ का.
मन का रेडियो बजने दे जरा, गम को भूल कर जी ले तू जरा.
स्टेशन कोई नया tune कर ले जरा, full to attitude दे दे तू जरा.
टुटा दिल क्या हुआ, हो गया जो हुआ .. आ आ आ आ. …
स्टेशन कोई नया tune कर ले जरा, full to attitude दे दे तू जरा.
टुटा दिल क्या हुआ, हो गया जो हुआ .. आ आ आ आ. …
भूले बिसरे गीत गाके तू भूल जा.
बदला जो rhythm उसपे जा
full to attitude दे दे तू जरा. आ आ आ आ आ
क्या होगा क्या नहीं होगा ऊपर वाले पर छोड़ दे. ऊपर वाले पर छोड़ दे.
आज इस पल मैं तू ज़िन्दगी को जी जरा, तुझको आकाश की वाणी का है वास्ता.
क्या खोया क्या नहीं पाया उसपे रोना तू छोड़ दे , उसपे रोना तू छोड़ दे.
band जो बजे तेरा खुल के तू भी साथ गा दर्द ही बने दवा funda है ये लाइफ का.
मन का रेडियो बजने दे जरा, गम को भूल कर जी ले तू जरा.
स्टेशन कोई नया tune कर ले जरा, full to attitude दे दे तू जरा.
टुटा दिल क्या हुआ, हो गया जो हुआ .. आ आ आ आ. …
A software engineer – a hindi poem
अपने project के बोझ तले दबा जा रहा है,
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
हजारो की तन्ख्वा वाला , करोडो की जेब भरता है.
सोफ्टवेयर इंजीनियर वही बन सकता है जो जिगर रखता है.
अपने PM और TL की रोज गालिया सुनता है.
पर वीक-एंड (weekend) को रोज याद रखता है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
कोडिंग करते – करते पता ही नही पड़ा कब बग्स की प्रिओरिटी माँ -बाप से ज्यादा हो गयी.
किताब मैं गुलाब रखने वाला , कब सिगरेट के धुए मैं खो गया.
वीक-इंड्स (weekends) पर दारु पी कर जो जश्न मना रहा है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
जीन्दगी से हारा हुआ है; पर bugs से हार नही मानता हे.
अपने application की एक-एक line ये जनता है.
दिन पर दिन , एक एक program फाईल बनाता जा रहा है;
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
दस हजार लाईन के कोड मे error ढूंड लेता हे;
लेकिन दोस्त के दिल की बात नही.
कंप्युटर पर हजार window खुली है;
पर दिल की खिडकी पर कोई दस्तक नही.
week-ends को नहाता नही; पर weekdays नहाता है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
खरचे बढ़ रहे है, बाल कम हो रहे है.
appraisal की डेट आती नही, इनकम टैक्स के सीतम हो रहे है.
लो फ़िर से company की बस (cab) छुट गयी , वो देखो आटो (auto) से आ रहा है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
ऑफिस की खाने थाली देख अपना मुह बिगड़ता है.
माँ के खाने को रोज याद करता है.
रोज लंच मैं (sudexho) कूपन और शाम को स्नेक्स (sneks) से काम चला रहा है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
आपने अब तक ली होंगी बहुत सी चुटकिया,
सोफ्टवेयर इंजीनियर के जीवन का सच बताती ये कुछ आखरी पंकतिया.
” इस कविता का हर शब्द मरे दिल की गहराई से आ रहा है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.”
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
हजारो की तन्ख्वा वाला , करोडो की जेब भरता है.
सोफ्टवेयर इंजीनियर वही बन सकता है जो जिगर रखता है.
अपने PM और TL की रोज गालिया सुनता है.
पर वीक-एंड (weekend) को रोज याद रखता है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
कोडिंग करते – करते पता ही नही पड़ा कब बग्स की प्रिओरिटी माँ -बाप से ज्यादा हो गयी.
किताब मैं गुलाब रखने वाला , कब सिगरेट के धुए मैं खो गया.
वीक-इंड्स (weekends) पर दारु पी कर जो जश्न मना रहा है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
जीन्दगी से हारा हुआ है; पर bugs से हार नही मानता हे.
अपने application की एक-एक line ये जनता है.
दिन पर दिन , एक एक program फाईल बनाता जा रहा है;
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
दस हजार लाईन के कोड मे error ढूंड लेता हे;
लेकिन दोस्त के दिल की बात नही.
कंप्युटर पर हजार window खुली है;
पर दिल की खिडकी पर कोई दस्तक नही.
week-ends को नहाता नही; पर weekdays नहाता है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
खरचे बढ़ रहे है, बाल कम हो रहे है.
appraisal की डेट आती नही, इनकम टैक्स के सीतम हो रहे है.
लो फ़िर से company की बस (cab) छुट गयी , वो देखो आटो (auto) से आ रहा है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
ऑफिस की खाने थाली देख अपना मुह बिगड़ता है.
माँ के खाने को रोज याद करता है.
रोज लंच मैं (sudexho) कूपन और शाम को स्नेक्स (sneks) से काम चला रहा है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.
आपने अब तक ली होंगी बहुत सी चुटकिया,
सोफ्टवेयर इंजीनियर के जीवन का सच बताती ये कुछ आखरी पंकतिया.
” इस कविता का हर शब्द मरे दिल की गहराई से आ रहा है.
वो देखो एक सोफ्टवेयर इंजीनियर जा रहा है.”
Hindi Poem on would-be wife: पत्नी की बाँहों में आकर
मैं अपनी पत्नी की बाँहों में आकर
खूब सुकून पाता हूँ
सारे दुःख गम टेंशन परेशानियां
पल में भूल जाता हूँ!
गोरी-गोरी उन बाँहों में
दिखती है मुझको जन्नत
हर जनम में मेरी ही रहना
मांगू रब से यही मन्नत!
उसकी बाँहों की जकड़न
हर दर्द निचोड़ देती है
थक रही सी जिन्दगी को
इक नया मोड़ दे देती है!
खुदा की बाहों में भी शायद
यकीनन न होगी वो बरकत
पत्नी की बाहें ही पति को
दे सकती हैं वो हरकत!
सर्दी-खांसी: A humorous Hindi poem on Cold and Cough
सर्दी-खांसी से बुरा हाल है 
डॉक्टर को दिखाया है
हालत सुधर रही है
ढेरों कैप्सूल खाया है!
जब सर्दी-खांसी हो जाती है
मन चिडचिडा हो जाता है
नाक बहती रहती है
कुछ भी नहीं भाता है!
भगवान् बड़े रोग दे दे
पर दे न कभी सर्दी-खांसी
कुछ खास नुकसान तो नहीं होता
पर मन में छायी रहती उदासी!
सर में थकान सी रहती है
सब भारी-भारी लगता है
किसी काम में दिल नहीं लगता
बस सोने का मन करता है!
नाक सुड-सुड करता है
आवाज अजीब हो जाती है
कुछ दिन आदमी नहीं नहाता
छीकें खूब आती हैं!
मैं तो इतना हेल्थी हूँ
फिर भी सर्दी लग जाती है
प्रकृति के आगे जोर नहीं चलता
सर्दी-खांसी सालाना आती है!

डॉक्टर को दिखाया है
हालत सुधर रही है
ढेरों कैप्सूल खाया है!
जब सर्दी-खांसी हो जाती है
मन चिडचिडा हो जाता है
नाक बहती रहती है
कुछ भी नहीं भाता है!
भगवान् बड़े रोग दे दे
पर दे न कभी सर्दी-खांसी
कुछ खास नुकसान तो नहीं होता
पर मन में छायी रहती उदासी!
सर में थकान सी रहती है
सब भारी-भारी लगता है
किसी काम में दिल नहीं लगता
बस सोने का मन करता है!
नाक सुड-सुड करता है
आवाज अजीब हो जाती है
कुछ दिन आदमी नहीं नहाता
छीकें खूब आती हैं!
मैं तो इतना हेल्थी हूँ
फिर भी सर्दी लग जाती है
प्रकृति के आगे जोर नहीं चलता
सर्दी-खांसी सालाना आती है!
Thursday, July 21, 2011
Lady and Bolane walaTota...
Ek din 1 lady tota kharidne gyi...
Lady - Iski kya khasiyat hai..?
Dukandar - Ye bolta hai...
Lady ne tote se pucha - Main kaisi lagti hu..?
Tota - saali character less lagti hai....!!!
Lady - Ye to bahot batmiz tota hai...
Dukandar tota andar le gya or zor se pani me duba ke pucha,bol ab gaali dega..?
Tota - Nahi kabi nahi dunga...!!
Wo usse bahar le gya or lady se kha ab puchiye..!!
Lady - agr mere ghr pe 1 admi aayega to tum kya sochoge..?
Tota - tumhara pati hai..!
Lady - Agr 2 ?
Tota - Tumhara pati or devar.
Lady - Agr 3?
Tota - Pati ,devar or bhai..
Lady - agr 4?
Tota - PANI LE AAO BHAI,MAINE TO PHALE HI KAHA THA SAALI CHARACTER LESS HAI..!
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